कान्ताबनिया थाने का घेराव: दलित युवक पर हमले के विरोध में बाहुजन समिति ने उठाया मोर्चा, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
ढेंकनाल, 8 सितंबर: कान्ताबनिया थाना क्षेत्र के मानपुर गांव में एक दलित युवक के साथ हुई कथित मारपीट और पुलिस की निष्क्रियता के विरोध में बाहुजन समिति के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सोमवार को कान्ताबनिया थाने का भीषण घेराव किया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने थाने के मुख्य द्वार को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया, जिससे क्षेत्र में प्रशासनिक कामकाज और आवाजाही कई घंटों तक ठप रही। 'संघर्ष रथ' के बैनर तले निकाले गए इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने नीले झंडे लहराते हुए 'जय भीम' के नारे लगाए और पुलिस की मिलीभगत पर सवाल खड़े किए, जबकि थाना परिसर को पूरी तरह से घेरकर अधिकारियों को बाहर निकलने से रोक दिया गया।
पीड़ित और आरोप: प्राप्त जानकारी के अनुसार, मानपुर निवासी यशवंत नायक पर कुछ लोगों ने हमला किया था। पीड़ित ने इस मामले में कान्ताबनिया थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और आरोपियों को बचा रही है, जबकि पीड़ित और उसका परिवार लगातार धमकियों का सामना कर रहा है। यह घटना उस समय सामने आई जब यशवंत नायक अपने गांव में था और कुछ स्थानीय लोगों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसके बाद पीड़ित ने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने न तो आरोपियों को गिरफ्तार किया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में है, जिसके कारण पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है।
प्रदर्शनकारियों का पक्ष: बाहुजन समिति के एक नेता ने थाने के बाहर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा, "हमलावर दिनदहाड़े खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। जब कोई पीड़ित न्याय मांगने थाने आता है, तो उसे उदासीनता मिलती है। जब तक आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती, हम पीछे नहीं हटेंगे"। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ हो रहे अन्याय के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई है, और समाज के दलित और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा। नेता ने आगाह किया कि अगर पुलिस ने जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया, तो बाहुजन समिति पूरे राज्य में बड़े विरोध प्रदर्शन करेगी और प्रशासनिक भवनों का घेराव करेगी।
ज्ञापन और मांगें: प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने थाने में प्रवेश कर जिला पुलिस प्रशासन को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं - हमले में शामिल सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करना, और पीड़ित यशवंत नायक और उनके परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान करना ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव का सामना न करना पड़े। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि जिला पुलिस अधीक्षक स्वयं इस मामले की निगरानी करें और सुनिश्चित करें कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
पुलिस का आश्वासन और विवाद: वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि निष्पक्ष जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन बाहुजन समिति ने इस आश्वासन को संतोषजनक नहीं माना और चेतावनी दी कि अगर आरोपियों को समय सीमा में गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे पूरे राज्य में बड़े विरोध प्रदर्शन करेंगे और सभी प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों का घेराव करेंगे। इस बीच, पीड़ित परिवार ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे अब पुलिस पर भरोसा नहीं करते और राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाएंगे।
रिपोर्ट: अमल के मैथ्यू

