DMF कोष का CAG ऑडिट: केन्दुझर में सामने आया बड़ा घोटाला, राज्य ने 25 किमी के दायरे में खर्च को किया सीमित
बड़बिल, 9 सितंबर: देश के सबसे बड़े खनिज रॉयल्टी कोष, ओडिशा के जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के प्रबंधन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की मसौदा ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है। CAG की इस रिपोर्ट ने केन्दुझर, सुंदरगढ़ और जाजपुर जिलों में पीएम खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के तहत कोष के व्यापक दुरुपयोग और अवैध खर्च का पर्दाफाश किया है, जिसने राज्य सरकार को सख्त नीतिगत बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है।
CAG की मसौदा ऑडिट रिपोर्ट, जो 2024 तक की अवधि को कवर करती है, में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। केन्दुझर और सुंदरगढ़ में अकेले 983.32 करोड़ रुपये उन 976 गांवों में खर्च किए गए, जो खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं थे, जबकि 488 प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित और 96 अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों में एक भी परियोजना लागू नहीं हुई। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि केन्दुझर जिला प्रशासन ने अकेले 168 करोड़ रुपये का अवैध खर्च किया, जिसमें ट्रस्ट बोर्ड या कार्यकारी समिति की मंजूरी के बिना पांच छात्रों को ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा के लिए 6.06 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत करना भी शामिल है। रिपोर्ट में DMF दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित स्कूल फर्नीचर, वर्दी और छात्रवृत्ति पर 138 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने का भी खुलासा हुआ है, जबकि केन्दुझर में 9.17 करोड़ रुपये की लागत से बने आठ ओडिशा आदर्श विद्यालय के छात्रावास और 2.09 करोड़ रुपये के उपकरण प्रशासनिक लापरवाही के कारण पूरी तरह से बेकार पड़े हैं।
"CAG की इस रिपोर्ट ने DMF कोष की पवित्रता पर गहरा आघात किया है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाया गया यह कोष कुछ लोगों की निजी जेब भरने का माध्यम बन गया।"
रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि केन्दुझर में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के संग्रह में से 2,984.28 करोड़ रुपये की 1,730 परियोजनाएं अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की अनिवार्य मंजूरी के बिना शुरू की गईं, जबकि 757 परियोजनाओं को ट्रस्टी बोर्ड के प्राधिकरण के बिना आगे बढ़ाया गया। इसके अलावा, CAG के निष्कर्षों के समानांतर, ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने वित्तीय धोखाधड़ी के माध्यम से DMF कोष के सीधे गबन से जुड़ी बड़ी गिरफ्तारियां की हैं, जिसमें एक अंतर-राज्यीय सिंडिकेट ने सरकारी बैंक चेकों को क्लोन करके मयूरभंज के DMF जिला परिषद खाते से 9.56 करोड़ रुपये की निकासी की।
"जब खनन पीड़ित क्षेत्रों के लिए बनाया गया कोष इस तरह लूटा जा रहा है, तो प्रशासन की जवाबदेही कहाँ है? यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक अपराध है।"
सार्वजनिक आक्रोश और CAG की कड़ी रिपोर्ट के बाद, ओडिशा योजना एवं समन्वय विभाग ने DMF खर्च के दायरे को सीमित करने के लिए सख्त परिचालन सुधार अधिसूचित किए। नए नियमों के अनुसार, किसी खदान से प्राप्त DMF कोष का उपयोग 70:30 के अनुपात में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों (खदान सीमा के 15 किमी के भीतर) और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों (15 किमी से 25 किमी के बीच) में किया जाना अनिवार्य होगा। राज्य ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में DMF कोष को खदान सीमा से 25 किमी से अधिक दूर खर्च नहीं किया जा सकता और इस धनराशि को राज्य के खजाने, मुख्यमंत्री राहत कोष या सामान्य राज्य-स्तरीय परियोजनाओं में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले में सरकार की मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट: संजय सिन्हा
