NPCI ने हाई-वैल्यू UPI लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट फीस अधिसूचित की, उपभोक्ता और छोटे विक्रेता शुल्क से मुक्त
दी बीबीएन पोस्ट (डेस्क) बड़बिल - भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतानों पर नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) संरचना के परिचालन दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। 15 अक्टूबर, 2026 से, पात्र वाणिज्यिक मर्चेंट लेनदेन जो ₹2,000 से अधिक के हों, उन पर 0.4% का मानक MDR लागू होगा, जिससे भारत के रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान नेटवर्क के व्यावसायिक मुद्रीकरण पर लंबे समय से चल रही बहस समाप्त हो गई है। यह घोषणा वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन करते हुए जारी की गई राजपत्र अधिसूचना के तुरंत बाद आई है, और दोनों नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि ये नए नियम पूरी तरह से मर्चेंट-साइड परिचालन व्यय के रूप में तैयार किए गए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को सभी व्यक्तिगत और खुदरा भुगतान स्तरों पर शून्य शुल्क का आश्वासन दिया गया है।
नई शुल्क संरचना के अनुसार, मानक व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतानों में ₹2,000 से अधिक की राशि पर व्यापारियों को कुल लेनदेन राशि का 0.4% शुल्क देना होगा—उदाहरण के लिए, ₹3,000 के भुगतान पर ₹12 का MDR लगेगा, जबकि ₹50,000 के लेनदेन पर ₹200 का शुल्क होगा। हालांकि, ₹75,000 और उससे अधिक के उच्च-मूल्य वाले मर्चेंट भुगतानों पर ₹300 की पूर्ण शुल्क सीमा लागू होगी, यानी ₹10 लाख के वाणिज्यिक लेनदेन पर प्रतिशत के हिसाब से ₹400 के बजाय केवल ₹300 ही शुल्क लगेगा। उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी, गैस), ईंधन, दूरसंचार और रेलवे बुकिंग जैसी आवश्यक सेवाओं में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन ₹5 का समान शुल्क लागू होगा, जबकि पूंजी बाजार निवेशों (म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकिंग) पर 0.02% की दर से शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।
NPCI ने एक विस्तृत FAQ दस्तावेज जारी करते हुए पारिस्थितिकी तंत्र में निर्मित महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को स्पष्ट किया है। इसके अनुसार, UPI ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay और Paytm) को उपयोगकर्ताओं पर प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने या लेनदेन अधिभार पारित करने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है, और मित्रों, परिवार को पैसे भेजना, बिल विभाजन या व्यक्तिगत खातों के बीच धन हस्तांतरण पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा, चाहे राशि कोई भी हो। सूक्ष्म व्यापारियों, फेरीवालों और स्थानीय दुकानदारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है, जो UPI QR कोड के माध्यम से प्रति माह ₹10 लाख तक प्राप्त करते हैं—वे व्यक्ति-से-व्यक्ति-व्यापारी (P2PM) श्रेणी में आते हैं और उन्हें शून्य MDR का लाभ मिलता रहेगा, भले ही कोई ग्राहक उन्हें ₹2,000 से अधिक का भुगतान करे। इसके अलावा, उन्हें GST पंजीकरण या भौतिक QR कोड बदलने की भी आवश्यकता नहीं होगी। उद्योग जगत में इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है, क्योंकि यह एक्वायरिंग बैंकों, भुगतान एग्रीगेटरों और फिनटेक कंपनियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है, जो 2020 में शून्य-MDR लागू होने के बाद से परिचालन लागतों से जूझ रही थीं। NPCI ने कहा कि 0.4% शुल्क से उत्पन्न राजस्व पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा, जिसका उपयोग अवसंरचना लचीलापन, सर्वर उन्नयन, धोखाधड़ी रोकथाम और ग्राहक सहायता को वित्तपोषित करने के लिए किया जाएगा, क्योंकि दैनिक लेनदेन की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त, सभी MDR संग्रह का 5% एक समर्पित कोष में डाला जाएगा, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में सूक्ष्म व्यवसायों के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने को प्रोत्साहित करना है।
रिपोर्ट: मो. नदीम अली
