UPI संरक्षण सीमा पर वित्त मंत्रालय ने जारी की राजपत्र अधिसूचना, उपभोक्ताओं पर कोई शुल्क नहीं
दी बी बी एन पोस्ट (डेस्क) बड़बिल - वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन करते हुए आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर ₹2,000 तक कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा। यह अधिसूचना 14 सितंबर, 2026 को जारी की गई, और इसका उद्देश्य छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतानों को संरक्षण प्रदान करना है, जो वॉल्यूम के आधार पर लगभग 96 प्रतिशत UPI लेनदेनों को कवर करता है। इसके साथ ही, RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले सभी भुगतानों को भी शून्य शुल्क संरक्षण के दायरे में रखा गया है, और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) हस्तांतरण—जैसे मित्रों, परिवार या छोटे दुकानदारों को पैसे भेजना—₹2,000 से अधिक की राशि के लिए भी पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि "कोई भी बैंक या प्रणाली प्रदाता, किसी व्यक्ति पर जो उपर्युक्त इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों का उपयोग करके भुगतान कर रहा है या प्राप्त कर रहा है, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाएगा।"
लोकसभा में इस सक्षमकारी संशोधन के पारित होने के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि यह नियम परिवर्तन सामान्य उपभोक्ताओं पर कोई कर या शुल्क नहीं लगाता। उन्होंने कहा था कि भविष्य में यदि कोई शुल्क ढांचा लागू किया जाता है, तो वह पूरी तरह से बड़े वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और व्यापारियों द्वारा वहन किया जाएगा—क्रेडिट कार्ड इंटरचेंज तंत्र के समान—ताकि डिजिटल भुगतान अवसंरचना को सतत बनाए रखा जा सके। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से संबंधित विस्तृत परिचालन दिशानिर्देशों को राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा बैंकिंग भागीदारों के परामर्श से अंतिम रूप दिए जाने की अपेक्षा है। सामान्य जनता के लिए, सभी नियमित दैनिक UPI उपयोग पूरी तरह से निःशुल्क बने रहेंगे। UPI वर्तमान में 11 देशों में स्वीकार किया जाता है, और अगस्त 2026 में इसने 24,500 मिलियन से अधिक लेनदेन संसाधित किए, जिनका मूल्य लगभग ₹29.82 लाख करोड़ था।
रिपोर्ट: अमल के मैथ्यू
